सावधान! उत्तराखंड में आया सामान्य से 10 गुना खतरनाक मलेरिया, जानिए इसके लक्षण और बचाव
संवाददाता: दून 1 न्यूज़ ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में बदलते मौसम और बढ़ते तापमान ने जनस्वास्थ्य के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू और मलेरिया के बढ़ते खतरों को देखते हुए पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तराखंड में कभी डेंगू ने विस्फोटक रूप लिया, तो अब मलेरिया के सबसे घातक रूप 'प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम' (PF Malaria) के मामलों ने विभाग और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है।
गंभीर बात यह है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब यह संक्रमण सिर्फ मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में भी इसका दायरा तेजी से फैल रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी, लगातार निगरानी और समय पर बेहतर उपचार मिलने के कारण राज्य में इन बीमारियों से होने वाली मौतों पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है।
📊 फ्लैशबैक: 2023 में डेंगू का तांडव और विभाग का एक्शन
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2023 उत्तराखंड के लिए डेंगू के लिहाज से सबसे भयावह रहा था।
• वर्ष 2023 में कुल 4,320 मामले सामने आए थे।
• डेंगू के कारण 17 लोगों की मौत दर्ज की गई थी।
इस भारी प्रकोप के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सबक लेते हुए पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर एंटी-लार्वा अभियान, फागिंग और घर-घर जाकर सर्वे शुरू किया। इस जमीनी स्तर की तैयारी का सकारात्मक असर अगले सालों में देखने को मिला और डेंगू के मामलों में कमी आई।
⚠️ 'प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम' (PF) मलेरिया ने बढ़ाई टेंशन
जहां एक तरफ डेंगू पर नियंत्रण पाया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ मलेरिया के एक खतरनाक रूप ने दस्तक दे दी है। वर्ष 2024 में मलेरिया के मामलों में अचानक उछाल देखा गया। वहीं, वर्ष 2025 और 2026 में राहत की बात यह रही कि कुल संक्रमितों की संख्या तो कम हुई, लेकिन प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (PF) मलेरिया के मामलों का अनुपात तेजी से बढ़ गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, उत्तराखंड के तीन जिले मलेरिया के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील (Sensative) पाए गए हैं:
1. हरिद्वार
2. ऊधमसिंह नगर
3. देहरादून
मिशन 2030: इन तमाम चुनौतियों के बावजूद उत्तराखंड सरकार और स्वास्थ्य विभाग का कड़ा संकल्प है कि वर्ष 2030 तक राज्य से मलेरिया का पूरी तरह उन्मूलन (Elimination) कर दिया जाए।
❓ सामान्य मलेरिया से कितना अलग और खतरनाक है 'PF मलेरिया'?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (PF) मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह सामान्य मलेरिया की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक और जानलेवा है।
• मुख्य लक्षण: तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी आना और सांस लेने में गंभीर दिक्कत।
• बड़ा खतरा: यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह शरीर के मुख्य अंगों (जैसे लिवर, किडनी और ब्रेन) को प्रभावित कर सकता है, जो मल्टीपल ऑर्गन फेलियर का कारण बन सकता है।
Doon 1 News' पर एनएचएम निदेशक डॉ. रश्मि पंत का विशेष संदेश:
"प्रदेश में डेंगू और मलेरिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। सभी जिलों को समय रहते रोकथाम और सख्त निगरानी के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आगामी बरसात के मौसम को देखते हुए सभी सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाइयों, जांच किट (Testing Kits) और बेड की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।"
जनता से अपील:
"लोग अपने घरों और आसपास पानी बिल्कुल जमा न होने दें। कूलर, गमलों और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें। यदि घर में किसी को भी तेज बुखार की शिकायत हो, तो लापरवाही न बरतें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच कराएं।"
— डॉ. रश्मि पंत, निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तराखंड
