नर्सिंग एकता मंच का बड़ा बयान: ज्योति रोतेला की हालत नाजुक, फर्जीवाड़े को लेकर दी चेतावनी

 नर्सिंग एकता मंच का फूटा गुस्सा: 160 दिनों के संघर्ष के बीच ज्योति रोतेला की हालत नाजुक, नाम के गलत इस्तेमाल पर जताई आपत्ति




देहरादून:

नर्सिंग एकता मंच की लंबी लड़ाई अब एक निर्णायक और भावुक मोड़ पर पहुंच गई है। 160 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद भी अपनी मांगों के लिए जूझ रहे नर्सिंग कर्मियों ने अब एक प्रेस नोट जारी कर अपनी पीड़ा और रोष व्यक्त किया है। मंच का कहना है कि वे न केवल व्यवस्था से लड़ रहे हैं, बल्कि अब उन्हें अपनों के बीच छिपे स्वार्थी तत्वों और नई-नई परीक्षाओं का भी सामना करना पड़ रहा है।


ज्योति रोतेला के नाम पर स्वार्थ की राजनीति?

मंच ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि कुछ लोग ज्योति रोतेला और नर्सिंग एकता मंच के नाम का गलत इस्तेमाल कर अपना निजी स्वार्थ सिद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं। मंच ने साफ किया कि ऐसे लोग आंदोलन को कमजोर कर रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं।


पेट्रोल कांड की सच्चाई आए सामने

हाल ही में ज्योति रोतेला पर पेट्रोल डालने की हृदयविदारक घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं बाजार में गर्म हैं। इस पर नर्सिंग एकता मंच ने मांग की है कि इस पूरी घटना की सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान मीडिया को ज्योति की कुछ तस्वीरें भी दिखाई गईं, जो उनकी गंभीर स्थिति को बयां करती हैं।


"ज्योति रोतेला इस समय गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में उनकी हालत काफी नाजुक बनी हुई है। एक महिला होने के नाते वह मानसिक और शारीरिक, दोनों ही स्तरों पर असहनीय पीड़ा से गुजर रही हैं।" - नर्सिंग एकता मंच



मंच के अनुरोध पर आई थीं साथ

मंच ने एक महत्वपूर्ण खुलासा करते हुए बताया कि शुरुआत में ज्योति रोतेला इस आंदोलन में शामिल होने को लेकर संकोच में थीं और उन्होंने मदद के लिए मना किया था। लेकिन नर्सिंग एकता मंच के बार-बार अनुरोध करने पर वह उनके समर्थन में आगे आईं और तब से लगातार कंधे से कंधा मिलाकर साथ देती रहीं।



मुख्य बिंदु:


लंबा संघर्ष: 160 दिनों से जारी है नर्सिंग एकता मंच की लड़ाई।

गंभीर हालत: ज्योति रोतेला की स्थिति नाजुक, अस्पताल में भर्ती।

भ्रामक प्रचार: नाम का गलत इस्तेमाल करने वालों को मंच की कड़ी चेतावनी।

न्याय की मांग: पेट्रोल कांड की निष्पक्ष जांच और सच्चाई उजागर करने की अपील।


नर्सिंग एकता मंच ने अंत में कहा कि यह लड़ाई केवल रोजगार की नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान और हक की है, जिसे वे किसी भी कीमत पर झुकने नहीं देंगे।


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