रेंजर्स ग्राउंड बना ‘कबाड़खाना’, ₹7 लाख का बजट पास फिर भी भगवान भरोसे सीज वाहन!
Doon 1 News (देहरादून): यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का ढिंढोरा पीटने वाला देहरादून का परिवहन विभाग (RTO) अब खुद गंभीर लापरवाही के घेरे में है। चालान काटने और वाहनों को सीज करने में फुर्ती दिखाने वाली प्रवर्तन विंग (Enforcement Wing) जब्त किए गए वाहनों की सुरक्षा करना ही भूल गई है। शहर के बीचों-बीच स्थित रेंजर्स ग्राउंड में खड़े सैकड़ों सीज वाहन आज पूरी तरह लावारिस हालत में पड़े हैं, जो धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं।
स्थिति यह है कि जिन वाहनों को नियम तोड़ने पर जब्त किया गया था, वे अब चोरी, तोड़फोड़ और भारी अव्यवस्था के शिकार हो रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन इस मैदान को सुरक्षित पार्किंग स्थल बनाने के लिए ₹7 लाख की धनराशि पहले ही जारी कर चुका है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी आरटीओ प्रवर्तन जमीन पर एक ईंट तक नहीं रख पाया है।
📋 कागजों में सिमटी योजना: ₹7 लाख का बजट आखिर कहाँ गया?
दरअसल, दिसंबर 2025 में देहरादून के जिलाधिकारी (DM) सविन बंसल ने सीज वाहनों को दूर आशारोड़ी या आरटीओ कार्यालय तक ले जाने की समस्या को खत्म करने के लिए रेंजर्स ग्राउंड के एक हिस्से को अधिकृत पार्किंग स्थल के रूप में चिह्नित किया था।
योजना के तहत यहाँ निम्नलिखित कार्य होने थे:
• सुरक्षित पार्किंग के लिए चारों तरफ बाउंड्रीवाल का निर्माण।
• तीसरी आंख की निगरानी के लिए CCTV कैमरे लगाना।
• सुरक्षा कर्मियों के बैठने के लिए फाइबर हट बनाना।
• रात के अंधेरे को दूर करने के लिए पर्याप्त लाइटिंग (प्रकाश व्यवस्था)।
इस पूरी योजना के लिए जिला प्रशासन ने लगभग सात लाख रुपये की धनराशि आरटीओ को ट्रांसफर भी कर दी थी। लेकिन आरटीओ प्रवर्तन विंग की सुस्ती के कारण आज तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो सका।
🚬 शाम होते ही नशेड़ियों का अड्डा बन जाता है ग्राउंड
स्थानीय निवासियों और सूत्रों के हवाले से बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। दिन ढलते ही रेंजर्स ग्राउंड के आसपास नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। ग्राउंड के दोनों गेट हमेशा खुले रहने के कारण कोई भी आसानी से अंदर घुस जाता है।
पार्ट्स चोरी होने की शिकायतें: सूत्रों के अनुसार, यहाँ खड़े वाहनों से टायर, बैटरी और महंगे पार्ट्स चोरी होने की कई घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। कई वाहनों के शीशे तोड़े जा चुके हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब वाहन सरकारी/प्रशासनिक कब्जे में हैं, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि किसी का वाहन यहाँ से चोरी या डैमेज होता है, तो उसका हर्जाना कौन भुगतेगा?
कार्रवाई का दिखावा, सुरक्षा पर चुप्पी
परिवहन विभाग की प्रवर्तन विंग सोशल मीडिया और प्रेस नोट के जरिए वाहनों को सीज करने की तस्वीरें और आंकड़े जारी कर खूब वाहवाही लूटती है। लेकिन उन्हीं वाहनों के रखरखाव को लेकर विभाग पूरी तरह मौन है। एक तरफ आम जनता अपने वाहनों को छुड़ाने के लिए आरटीओ के चक्कर काटती है और भारी जुर्माना भरती है, वहीं दूसरी तरफ जब तक वाहन प्रशासन की कस्टडी में रहते हैं, उनका कबाड़ होना लगभग तय माना जाता है।
आरटीओ का रटा-रटाया दावा, जल्द लगेंगे CCTV
इस पूरे मामले पर जब Doon 1 News ने आरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. अनीता चमोला का पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन से ₹7 लाख की धनराशि प्राप्त हो चुकी है। जल्द ही रेंजर्स ग्राउंड में बाउंड्रीवाल, सीसीटीवी कैमरे और लाइटें लगाने का काम शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि विभाग की टीम रात के समय ग्राउंड का निरीक्षण करती है।
