नेलांग घाटी से खुलेगा कैलाश मानसरोवर का पौराणिक रास्ता? संतों ने सरकार को भेजा प्रस्ताव

 उत्तरकाशी: नेलांग-कैलाश मानसरोवर कॉरिडोर की मांग, भारत-चीन सीमा पर देशभर से पहुंचे संतों ने लिया संकल्प



 उत्तरकाशी (Doon 1 News): भारत-चीन सीमा पर स्थित नेलांग घाटी एक बार फिर चर्चाओं में है। पहली बार शुरू की गई 'कैलाश मुक्त यात्रा' के तहत देशभर से आए साधु समाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्यों ने नेलांग पहुंचकर कैलाश मानसरोवर के पौराणिक मार्ग को फिर से खुलवाने का संकल्प लिया है।


शिव-पार्वती चोटी की तलहटी में गूंजा संकल्प

समुद्रतल से करीब 11,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित नेलांग में गंगा पूजन के साथ एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि नेलांग-जादूंग-कैलाश मानसरोवर कॉरिडोर की स्थापना की जाए। साधु-संतों का यह समूह काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक और गंगोत्री धाम के दर्शन के बाद इस दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंचा था।


क्यों खास है यह मार्ग?

यात्रा का नेतृत्व कर रही साध्वी रेणुका गुरु मां ने इस मार्ग के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला:

पौराणिक मार्ग: प्राचीन काल में साधु-संत गंगोत्री से नेलांग, जादूंग और अंतिम सीमा झेलूखागा के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाते थे।

पवित्र जल: गंगोत्री से पशुपतिनाथ मंदिर जाने वाला जल भी इसी मार्ग से ले जाया जाता था।

सुगम रास्ता: अन्य रास्तों की तुलना में यह मार्ग छोटा और सुगम है, जो पूर्व में भारत-तिब्बत व्यापार का मुख्य केंद्र था।


"तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद यह पौराणिक मार्ग बंद हो गया था। अब गंगा माँ के सानिध्य में इस अभियान की शुरुआत हुई है, जो कॉरिडोर बनने तक जारी रहेगी।" - साध्वी रेणुका गुरु मां


पीएम और गृह मंत्री को सौंपा जाएगा प्रस्ताव

लाल देवता परिसर में हुई विशेष पूजा के बाद करीब 100 संतों और आरएसएस पदाधिकारियों ने मिलकर प्रस्ताव पारित किया। इस मांग को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष रखा जाएगा। संतों का कहना है कि भारत सरकार को चीन सरकार से वार्ता कर इस कॉरिडोर को धार्मिक पर्यटन और सामरिक दृष्टि से विकसित करना चाहिए।




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