देहरादून: PRD जवानों की सरकार को 'अंतिम चेतावनी', 18 अप्रैल की कैबिनेट में फैसला नहीं तो होगा महा-आंदोलन!

 देहरादून: PRD जवानों के आंदोलन का 30वां दिन, पूर्व मुख्यमंत्री ने दिया समर्थन; 18 अप्रैल की कैबिनेट बैठक बनी 'अग्निपरीक्षा'


देहरादून | राजधानी के एकता विहार में अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर डटे प्रांतीय रक्षक दल (PRD) जवानों का धरना आज लगातार 30वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन के एक महीना पूरा होने पर जवानों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। जवानों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि आगामी 18 अप्रैल को होने वाली कैबिनेट बैठक में उनके हितों से जुड़ा प्रस्ताव नहीं लाया गया, तो यह शांतिपूर्ण आंदोलन एक बड़े उग्र प्रदर्शन में तब्दील हो जाएगा।


पूर्व मुख्यमंत्री का समर्थन: "कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं"

आज दोपहर करीब 3:30 बजे पूर्व मुख्यमंत्री श्री रावत जी धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने जवानों की समस्याओं को सुना और उनकी मांगों को जायज ठहराते हुए सरकार को घेरा। रावत जी ने कहा:


"अगर कैबिनेट में PRD जवानों की मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आगामी रैली में हम जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे। इनकी वर्षों से लंबित मांगों को अनसुना करना दुर्भाग्यपूर्ण है।"


18 अप्रैल की डेडलाइन और आगे की रणनीति

PRD जवानों के संगठन ने सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि वह अब तक शासन-प्रशासन का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से बैठे हैं। लेकिन यदि 18 अप्रैल को कैबिनेट में प्रस्ताव नहीं रखा जाता, तो:

1. 19 अप्रैल को प्रदेश स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक बुलाई जाएगी।

2. इस बैठक में महारैली और उग्र आंदोलन की रूपरेखा तैयार होगी।

3. आंदोलन से होने वाली किसी भी अव्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

"सम्मान या संघर्ष" - प्रदेश संयोजक प्रमोद मंदरवाल

प्रदेश संयोजक प्रमोद मंदरवाल ने कड़े शब्दों में कहा, "हम अभी भी सरकार से आस लगाए बैठे हैं और 18 तारीख तक कोई रैली नहीं करेंगे। हम चाहते हैं कि सरकार हमारी मांगों को कैबिनेट में रखे ताकि हम मंत्री महोदया और सरकार का आभार व्यक्त कर सकें। लेकिन अगर हमें नजरअंदाज किया गया, तो धैर्य का बांध टूट जाएगा।"





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