दून बुक फेस्टिवल, देहरादून न्यूज, उत्तराखंड साहित्य।

 दून बुक फेस्टिवल: कैबिनेट मंत्री खजान दास और आचार्य बालकृष्ण ने छात्रों को बांटी पुस्तकें, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश।



देहरादून।

राजधानी के ऐतिहासिक परिवेश में आयोजित 'दून बुक फेस्टिवल' ज्ञान, साहित्य और रचनात्मकता का संगम बन गया है। इस महोत्सव में न केवल देश-दुनिया के प्रकाशकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों ने भी पाठकों का ध्यान आकर्षित किया।


विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

इस अवसर पर प्रदेश के माननीय कैबिनेट मंत्री श्री खजान दास जी, देहरादून के महापौर श्री सौरभ थपलियाल जी एवं पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने विभिन्न स्टॉलों का बारीकी से अवलोकन किया और पुस्तक मेले की व्यवस्थाओं की सराहना की।





'बुके नहीं, बुक और पौधे' की नई परंपरा का आह्वान

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने छात्रों से संवाद किया और उन्हें पुस्तकें भेंट कर निरंतर अध्ययन के लिए प्रेरित किया। इस दौरान समाज को एक बड़ा संदेश देते हुए उन्होंने आग्रह किया कि, "जब भी आप किसी सार्वजनिक समारोह या कार्यक्रम में जाएं, तो वहां फूलों के बुके या महंगे उपहारों के स्थान पर पुस्तकें और पौधे भेंट करने की परंपरा अपनाएं।" इससे न केवल समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलेगा, बल्कि पर्यावरण का भी संवर्धन होगा।


उत्तराखंड की समृद्ध भाषाई विरासत

समारोह में वक्ताओं ने देवभूमि की पावन धरा को ज्ञान और साहित्य की जननी बताया। उन्होंने कहा कि गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी जैसी क्षेत्रीय भाषाएं, हमारे पारंपरिक लोकगीत और लोककलाएं उत्तराखंड के असली साहित्यिक वैभव की पहचान हैं। यह भूमि महान साहित्यकारों की जननी रही है, जिन्होंने भारतीय साहित्य को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयां दी हैं।



इस महोत्सव में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और साहित्य प्रेमी पहुंच रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि डिजिटल युग में भी पुस्तकों के प्रति युवाओं का आकर्षण कम नहीं हुआ है।


रिपोर्ट: डून 1 न्यूज़ डेस्क

(Edited by Amit Sharma)





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