देहरादून: लोक निर्माण विभाग के मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों का सचिवालय कूच |

देहरादून: लोक निर्माण विभाग के मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों का सचिवालय कूच, तबादला नीति पर आर-पार की जंग।




देहरादून में उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग (PWD) मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों और पारंपरिक स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर परेड ग्राउंड से सचिवालय तक विरोध मार्च निकाला। कर्मचारियों ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए आंदोलन तेज करने की बात कही है।


देहरादून, 18 फरवरी 2026:

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आज लोक निर्माण विभाग (PWD) मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों और पारंपरिक स्थानांतरण प्रक्रिया को लागू करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। परेड ग्राउंड से सचिवालय तक निकाले गए इस 'सचिवालय कूच' में बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए, जिससे शासन-प्रशासन में हड़कंप मच गया।




स्पष्ट नियमावली के बावजूद अनदेखी का आरोप

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि स्थानांतरण (तबादला) से संबंधित सरकारी नियमावली पूरी तरह स्पष्ट है, लेकिन विभाग के आला अधिकारियों द्वारा इसका पालन नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी से विभाग में असंतोष की स्थिति बनी हुई है और पात्र कर्मचारी अपने अधिकारों से वंचित हैं।





"अधिकारी पद छोड़ें" – प्रदर्शनकारियों का कड़ा रुख

आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने दो-टूक शब्दों में कहा:


"यदि अधिकारी कानून और नियमावली के अनुरूप कार्य करने में असमर्थ हैं, तो उसी कानून में यह स्पष्ट प्रावधान भी है कि कर्तव्य पालन न करने की स्थिति में संबंधित अधिकारी को अपना पद छोड़ देना चाहिए।"


उग्र आंदोलन की चेतावनी

सचिवालय कूच के माध्यम से कर्मचारियों ने सरकार और विभाग को चेतावनी दी है कि यदि उनकी न्यायोचित मांगों पर शीघ्र ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वर्तमान आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। कर्मचारियों ने साफ किया कि वे अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे, उन्हें धरातल पर कार्रवाई चाहिए।

मुख्य बिंदु:

स्थान: परेड ग्राउंड से सचिवालय, देहरादून।

मुख्य मांग: पारंपरिक स्थानांतरण प्रक्रिया (Traditional Transfer Process) की बहाली।

नाराजगी का कारण: स्पष्ट नियमावली होने के बावजूद उसका पालन न होना।

चेतावनी: मांगे पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन की रणनीति।






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