रामनगर में बाघ ने 60 साल की महिला का किया शिकार, शव घसीट कर जंगल में ले गया, ग्रामीण डरे
उत्तराखंड में जंगली जानवरों का आतंक कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है. अब रामनगर में बाघ ने महिला को निवाला बनाया
रामनगर: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे रामनगर क्षेत्र के एक बार फिर बाघ का हमले की खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि ढेला रेंज के सांवल्दे गांव में शुक्रवार दो जनवरी को बाघ ने 60 साल की महिला पर हमला किया. इस हमले में महिला की मौत हो गई. बाघ, महिला को घसीट कर जंगल के भीतर भी ले गया था.
मृतक महिला की शिनाख्त 60 साल की सुखियां पत्नी चंदू सिंह निवासी सांवल्दे गांव रामनगर के रूप में हुई है. सुखियां बक्सा समुदाय से ताल्लुक रखती थी. बताया जा रहा है कि सुखियां रोजाना की तरफ गांव की अन्य महिलाओं के साथ घर के पास जंगल में ही लकड़ी लेने गई थीं. तभी पहले से घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक से सुखियां पर हमला कर दिया.
वहीं मामले की जानकारी मिलते ही कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला, उप निदेशक राहुल मिश्रा सहित वन विभाग की पूरी टीम मौके पर पहुंची. महिला को ढूंढने के लिए तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. काफी प्रयासों के बाद वन कर्मियों को महिला का शव जंगल के अंदर से मिला.
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने बताया कि बाघ के हमले की सूचना मिलने पर ग्रामीण हथियारों, लाठी-डंडों और तलवारों के साथ मौके पर पहुंच रहे थे, जिन्हें तत्काल रोका गया.
जंगल में कुछ महिलाएं लकड़ी लेने गई थी. तभी बाघ ने एक महिला का शिकार किया. इसके बाद एसएचओ रामनगर और अन्य पुलिस बल को तुरंत मौके पर बुलाया गया. वन विभाग के साथ संयुक्त टीम बनाकर महिला का शव जंगल के अंदर से रिकवर किया गया.
-मंजूनाथ टीसी, एसएसपी, नैनीताल-
बाघ की गतिविधियों रखी जा रही नजर:इस घटना के बाद वन विभाग ने इलाके में अतिरिक्त वन कर्मियों को तैनात कर दिया है. साथ ही आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है, ताकि बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके. ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे जंगल की ओर अकेले न जाएं और पूरी सतर्कता बरतें.
इलाके में पिंचरे लगाए गए:कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के लिए मौके पर पिंजरे लगाए जा रहे हैं. इसके साथ ही कैमरा ट्रैप और ड्रोन के माध्यम से बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. उन्होंने दोहराया कि सर्दियों के मौसम में वन्यजीव अधिक आक्रामक हो जाते हैं, इसलिए ग्रामीण जंगल में प्रवेश न करें.



